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कहीं आप भी तो नही करते घर मे बने मंदिर मे यह गलतियाँ

सनातन धर्म में कहा गया है कि घर में मंदिर के होने से सकारात्मक ऊर्जा उस घर में बनी रहती है. आज बेशक हम विकसित होने की राह पर हैं किन्तु आज भी हिन्दू लोगों ने अपने संस्कार और संस्कृति का त्याग नहीं किया है. घर चाहे छोटा हो, या बड़ा, अपना हो या किराये का, लेकिन हर घर में मंदिर जरूर होता है सभी घरों में देवी-देवताओं के लिए एक अलग स्थान होता है। कुछ घरों में छोटे-छोटे मंदिर बनवाए जाते हैं। लेकिन हम जानकारी के अभाव में मंदिर में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो कि अशुभ होती है। आज मै राघव आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहा हूं, जो कि घर के मंदिरों में नहीं की जानी चाहिए।

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घर के मंदिर में सभी श्री गणेश की मूर्तियां तो रखते हैं, लेकिन पूजा घर में कभी भी गणेश जी की 3प्रतिमाएं नहीं होना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा होने सही नहीं होता है।

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आप अपने घर के मंदिर में पूजा करने के लिए शंख तो रखते ही होंगे, लेकिन कभी आपके घर में दो शंख तो नहीं है। अगर मंदिर में दो शंख है तो आप उनमे से एक शंख हटा दें।

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 घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। बताया जाता है कि यदि हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा-सा शिवलिंग रखना शुभ होता है।

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शास्त्रों के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित है। जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है।

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पूजन करते वक्त ये भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।

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 घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए। मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए। पूर्वजों के चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा क्षेत्र रहती है। घर में दक्षिण दिशा की दीवार पर मृतकों के चित्र लगाए जा सकते हैं, लेकिन मंदिर में नहीं रखना चाहिए।

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पूजा के मंदिर देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि कभी भी बिना धोएं अर्पित ना करें। ये चीजें अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए।

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 घर में पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज रखें। भगवान का मंदिर ऊपर से खाली होना चाहिए, साथ ही मंदिर पर गुंबद होना चाहिए।

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 पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है। घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।

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